ऑडिट कमिटी में निम्नलिखित डायरेक्टर्स सदस्य के रूप में शामिल हैं
श्री मनोज कृष्णा जेवी, कंपनी सचिव और अनुपालन अधिकारी, ऑडिट कमिटी के सचिव के रूप में कार्य करते हैं।
ऑडिट कमिटी के संदर्भ की सामान्य शर्तें निम्न प्रकार हैं
कंपनी की फाइनेंसियल रिपोर्टिंग प्रक्रिया की निगरानी और उसकी फाइनेंसियल जानकारी का प्रकटीकरण यह सुनिश्चित करने के लिए कि फाइनेंसियल स्टेटमेंट सही, पर्याप्त और विश्वसनीय हैं;
बोर्ड को वैधानिक ऑडिटर की नियुक्ति, रि-अपॉइंटमेंट और यदि जरूरी हो तो वैधानिक ऑडिट करने वाले का रिपलेसमेंट या रिमूव करने और ऑडिट फीस का निर्धारण;
वैधानिक ऑडिट द्वारा प्रदान की गई किसी भी अन्य सर्विस के लिए वैधानिक ऑडिटर को भुगतान की स्वीकृति
बोर्ड को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने से पूर्व वार्षिक फाइनेंसियल स्टेटमेंट की प्रबंधन के साथ समीक्षा करना, विशेष रूप से निम्नलिखित के संदर्भ में
निदेशक के उत्तरदायित्व विवरण में शामिल किए जाने वाले अपेक्षित मामलों को बोर्ड की रिपोर्ट में शामिल किया जाना चाहिए
एकाउंटिंग पॉलिसी और प्रैक्टिस यदि कोई परिवर्तन हुआ हो तो उसके कारण
प्रबंधन द्वारा निर्णय के प्रयोग पर आधारित अनुमानों से संबंधित प्रमुख एकाउंटिंग प्रविष्टियां
ऑडिट निष्कर्षों से उत्पन्न फाइनेंसियल स्टेटमेंट में किए गए महत्वपूर्ण एडजस्टमेंट
फाइनेंसियल स्टेटमेंट से संबंधित लिस्टिंग और अन्य वैधानिक जरूरतों का अनुपालन
किसी भी संबंधित पक्ष के लेनदेन का प्रकटीकरण
ड्राफ्ट ऑडिट रिपोर्ट में विशिष्टताएं
बोर्ड द्वारा अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने से पूर्व प्रबंधन के साथ फाइनेंसियल स्टेटमेंट की समीक्षा करना
प्रबंधन के साथ वैधानिक और इंटरनल ऑडिट के प्रदर्शन तथा इंटरनल कंट्रोल सिस्टम की पर्याप्तता की समीक्षा करना
यदि कोई हो, इंटरनल ऑडिट फ़ंक्शन की पर्याप्तता की समीक्षा करना; जिसमें इंटरनल ऑडिट विभाग के स्ट्रक्चर, विभाग के प्रमुख अधिकारी का कर्मचारी-वर्ग और वरिष्ठता, रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर, कवरेज और इंटरनल ऑडिट की आवृत्ति शामिल हैं
इंटरनल ऑडिट के साथ किसी भी महत्वपूर्ण निष्कर्ष पर चर्चा और उस पर फॉलो-अप कार्रवाई करना
इंटरनल ऑडिट द्वारा की गई किसी भी इंटरनल जांच के निष्कर्षों की समीक्षा करना जहां धोखाधड़ी या अनियमितता या भौतिक प्रकृति की इंटरनल कंट्रोल सिस्टम की विफलता का संदेह हो और मामले की रिपोर्ट बोर्ड को करना
ऑडिट प्रारंभ होने से पूर्व वैधानिक ऑडिटर्स के साथ ऑडिट की प्रकृति एवं सीमा विषयक विचार-विमर्श, साथ ही चिंता के किसी भी क्षेत्र का निर्धारण के लिए ऑडिट के बाद विचार-विमर्श
जमाकर्ताओं, डिबेंचर धारकों, शेयरधारकों (घोषित लाभांश का भुगतान न करने की स्थिति में) और लेनदारों को भुगतान में भारी चूक के कारणों की जांच करना
निर्गम आय के उपयोग को मॉनिटर करना
संबंधित पक्षों के साथ कंपनी के लेनदेन की स्वीकृति अथवा बाद में किया गया कोई भी संशोधन
इंटर-कॉर्पोरेट लोन और निवेशों की समीक्षा
कंपनी के उपक्रमों या एसेट का मूल्यांकन और
ऐसे दूसरे फ़ंक्शन, जिन्हें बोर्ड द्वारा समय-समय पर विशेष रूप से निर्देशित किया जा सकता है